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Air Pollution Se Kaun Si Bimari Hoti hai? बीमारियां से बचने के उपाए.

दिल्ली में स्मॉग (प्रदूषण) लगातार बढ़ रहा है। धुंवे और धुंध के मिश्रण को स्मॉग कहते हैं। स्मॉग स्वास्थ्य के लिये बहुत हानिकारक है। टी बी, अस्थमा स्मॉग से होने वाले प्रमुख रोग हैं।

Air Pollution Se Kaun Si Bimari Hoti hai?

आंखे खुजलाना या आंखों में जलन होना।
ज़ुकाम , खांसी गले मे इंफेक्शन।
सांस फूलना।

स्मॉग Air Pollution लगातार बढ़ रहा है
Air Pollution बढ़ने के कारन

बचाव के उपाय Preventive Measures

गुड़ या शहद रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, जिससे अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है, स्मॉग (प्रदूषण) से भी।
काली मिर्च पीसकर चूर्ण बना लें, 1 चम्मच शहद में डालकर थोड़ा सा काली मिर्च पॉवडर डालकर खाने से फेफड़े साफ होते हैं और प्रदूषण का असर कम हो जाता है।
फेस मास्क पहन कर ही घर से निकलें व मास्क को बार बार ना छुएँ।
चश्मा पहन कर निकलें।
वापस घर आने पर अच्छी तरह हाथ मुँह धोएं गर्म पानी से कुल्ला करें व 1 ग्लास हल्का गर्म पानी पिएं।

पृथ्वी की जलवायु में फैलते प्रदूषण को देखते हुए दिन-प्रतिदिन चिंता बढ़ती जा रही है वातावरण पोलूशन।

वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर पृथ्वी की जलवायु में होने वाले परिवर्तन चिंता का विषय बने हुए हैं| यह परिवर्तन पृथ्वी के भीतर होने वाले उत्तल पुथल के कारण और पृथ्वी वासियों के द्वारा भी हो रहे हैं जो जलवायु पर विपरीत असर डालते हैं|वास्तव में ग्रीनहाउस गैसों के भारी और अनियंत्रित उत्सर्जन से पृथ्वी गर्म हो रही है जिसे ग्लोबल वार्मिंग के नाम से जाना जाता है

इसका कारण बड़ी-बड़ी मिले और फैक्ट्रियों की चिमनीओं से निकलने वाले प्रदूषण कारी घुआं है| इससे पृथ्वी की ओजोन परत को हानि पहुंच रही है| ग्रीन हाउस गैसों का यह बेलगाम उत्सर्जन पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले चुका है और पृथ्वी पर जीवन के लिए गंभीर समस्या बन रहा है|

पृथ्वी के भीतर की घटनाओं पर तो हमारा नियंत्रण नहीं है पर ऐसी गतिविधियों पर तो लगाम लगाई दी जा सकती है जो हमारे बस में है| इस गंभीर खतरे का ठोस हल निकालने के लिए पैसे का स्तर पर कई प्रयास किए गए हैं| इनमें सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले 20 देशों के बीच है ग्रीन हाउस गैसों पर नियंत्रण करें भविष्य में ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के उपाय पर सहमती बनाना जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण के लिए कार्य योजना का खाका तैयार करना तथा इस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए विकसित और विकासशील देशों के बीच लंबी अवधि की रणनीति बनाना शामिल है|

इन सभी प्रयासों के अलावा वैज्ञानिक भी अपने स्तर पर ऐसी तकनीकें विकसित करने में लगे हैं जिससे यह खतरा कम हो, ऐसी तकनीक विकसित करना शामिल है जिसमें हानिकारक गैसों को तरल रूप में बदल कर जमीन के भीतर बने विशेष भंडार गृहों में दबाया जाएगा वैज्ञानिकों के प्रयास अपनी जगह पर बेहतर है| बीमारी की रोकथाम के लिए यह जरूरी है कि इन हानिकारक गैसों के उत्सर्जन को यदि पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता तो कम से कम उसकी मात्रा को न्यूनतम किया जाए ताकि उसके दुष्परिणामों को सीमित किया जा सके|

इसे अधिकतर लोगो तक पहुंचाएं और अपने आप को प्रदूषण से होने वाले बिमारियों और शहर, गांव को प्रदूषित होने से बचायें।

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