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एक राजा ने अपने जीजा की सिफारिश पर एक आदमी को मौसम विभाग का मंत्री

एक राजा ने अपने जीजा की सिफारिश पर एक आदमी को मौसम विभाग का मंत्री बना दिया।
एक बार उसने शिकार पर जाने से पहले उस मंत्री से मौसम की भविष्य वाणी पूछी 
मंत्री जी बोले “ज़रूर जाइए,,, मौसम कई दिनो  तक बहुत अच्छा है”
राजा थोड़ी दूर गया था कि रास्ते में एक कुम्हार मिला – वो बोला “महाराज तेज़ बारिश आने वाली है…… कहाँ जा रहे हैं ? “
अब मंत्री के मुक़ाबले कुम्हार की बात क्या मानी जाती, उसे वही चार जूते मारने की सज़ा सुनाई और आगे बढ़ गये
थोड़ी देर  बाद तेज़ आँधी के साथ बारिश आई और जंगल दलदल बन गया , राजा जी जैसे तैसे महल में वापस आए , पहले तो उस मंत्री को बर्खास्त किया ,
फिर उस कुम्हार को बुलाया – इनाम दिया और मौसम विभाग के मंत्री पद की पेशकश की – कुम्हार बोला हुज़ूर मैं क्या जानू? मौसम- वौसम क्या होता है?  वो तो जब मेरे गधे के कान ढीले हो कर नीचे लटक जाते हैं, मैं समझ जाता हूँ वर्षा होने वाली है, और मेरा गधा कभी ग़लत साबित नहीं हुआ. राजा ने तुरंत कुम्हार को छोड़ कर उसके गधे को मंत्री बना दिया –
तब से ही गधों को मंत्री बनाने की प्रथा चली आ रही है

गर्लफ्रेंड:-मेरा मोबाइल मां के पास रहता है…
बॉयफ्रेंड :अगर पकड़ी गई तो ?
गर्लफ्रेंड : तुम्हारा नंबर (बैटरी लो) नाम से Save है,,
जब भी तुम्हारा फोन आता है…
मां कहती है लो चार्ज कर लो…।।
लड़का बेहोश है।

एक बार 300 पागल Ship मेँ जा रहे थे.. Ship डूबी नही, फिर भी सब मर गए..
कैसे..?
बीच समंदर मे Ship बिगड़ गयी थी,
साले धक्का देने उतर गए थे…!!

एक खरगोश रोज़ एक लोहार की दुकान पर जाता और पूछता
“गाजर है???
लोहार इंकार कर देता।
एक दिन लोहार को बहुत गुस्सा आया और उसने पकड़कर खरगोश के दांत तोड़ दिए। और कहा – अब तू “गाजर” खा के दिखा?
फिर ? फिर क्या
अगले दिन खरगोश आया और पूछने लगा –
“गाजर का हलवा है???” इसे कहते हैं attitude.

लड़का : क्या तुम मुझसे प्यार करती हो?
लडकी : हाँ, मै तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती हू
लड़का : सच
लड़की : हाँ
लड़का : चल फिर 47 का पहाडा सुना फटाफट…
लड़की : तु सिंगल ही मरेगा कुत्ते

अध्यापक कक्षा में चिंटू से पूछता है।
अध्यापक- समुन्दर में नींबू का पेड़ हो
तो तुम नींबू कैसे तोड़ोगे?
चिंटू- चिडि़या बनकर।
अध्यापक- तुझे चिडि़या तेरा बाप बनाएगा?
चिंटू- समुन्दर में पेड़ आपका बाप लगाएगा?

लड़की कुर्ती सिलवाने टेलर् के पास गई।
टेलर से बोली : ” भैया कुर्ती का बाजू नेट वाला लगाना।
टेलर : ” मैडमजी ! 3G या 4G

अगर किसी को भी मेरे मैसेज से शिकायत है या अच्छे नहीं लगते तो आपको पूरा हक
है कि अपने. . . . . मोबाईल को अपने नज़दीकी दीवार पे ज़ोर से मारकर तोड़ दें
क्योंकि आपकी खुशी से बढ़कर और कुछ नही है मेरे लिए।

एक बच्चे को आम का पेड़ बहुत पसंद था।
जब भी फुर्सत मिलती वो आम के पेड के पास पहुच जाता।
पेड के उपर चढ़ता,आम खाता,खेलता और थक जाने पर उसी की छाया मे सो जाता।
उस बच्चे और आम के पेड के बीच एक अनोखा रिश्ता बन गया।
बच्चा जैसे-जैसे बडा होता गया वैसे-वैसे उसने पेड के पास आना कम कर दिया।
कुछ समय बाद तो बिल्कुल ही बंद हो गया।
आम का पेड उस बालक को याद करके अकेला रोता।
एक दिन अचानक पेड ने उस बच्चे को अपनी तरफ आते देखा और पास आने पर कहा,
“तू कहां चला गया था? मै रोज तुम्हे याद किया करता था। चलो आज फिर से दोनो खेलते है।”
बच्चे ने आम के पेड से कहा,
“अब मेरी खेलने की उम्र नही है
मुझे पढना है,लेकिन मेरे पास फीस भरने के पैसे नही है।”
पेड ने कहा,
“तू मेरे आम लेकर बाजार मे बेच दे,
इससे जो पैसे मिले अपनी फीस भर देना।”
उस बच्चे ने आम के पेड से सारे आम तोड़ लिए और उन सब आमो को लेकर वहा से चला गया।
उसके बाद फिर कभी दिखाई नही दिया।
आम का पेड उसकी राह देखता रहता।
एक दिन वो फिर आया और कहने लगा,
“अब मुझे नौकरी मिल गई है,
मेरी शादी हो चुकी है,
मुझे मेरा अपना घर बनाना है,इसके लिए मेरे पास अब पैसे नही है।”
आम के पेड ने कहा,
“तू मेरी सभी डाली को काट कर ले जा,उससे अपना घर बना ले।”
उस जवान ने पेड की सभी डाली काट ली और ले के चला गया।
आम के पेड के पास अब कुछ नहीं था वो अब बिल्कुल बंजर हो गया था।
कोई उसे देखता भी नहीं था।
पेड ने भी अब वो बालक/जवान उसके पास फिर आयेगा यह उम्मीद छोड दी थी
फिर एक दिन अचानक वहाँ एक बुढा आदमी आया। उसने आम के पेड से कहा,
शायद आपने मुझे नही पहचाना,
मैं वही बालक हूं जो बार-बार आपके पास आता और आप हमेशा अपने टुकड़े काटकर भी मेरी मदद करते थे।”
आम के पेड ने दु:ख के साथ कहा,
“पर बेटा मेरे पास अब ऐसा कुछ भी नही जो मै तुम्हे दे सकु।”
वृद्ध ने आंखो मे आंसु लिए कहा,
“आज मै आपसे कुछ लेने
नही आया हूं बल्कि आज तो मुझे आपके साथ जी भरके खेलना है,
आपकी गोद मे सर रखकर सो जाना है।”
इतना कहकर वो आम के पेड से लिपट गया और आम के पेड की सुखी हुई डाली फिर से अंकुरित हो उठी।
वो आम का पेड़ कोई और नही हमारे माता-पिता हैं दोस्तों ।
जब छोटे थे उनके साथ खेलना अच्छा लगता था।
जैसे-जैसे बडे होते चले गये उनसे दुर होते गये।
पास भी तब आये जब कोई जरूरत पडी, कोई समस्या खडी हुई।
आज कई माँ बाप उस बंजर पेड की तरह अपने बच्चों की राह देख रहे है।
जाकर उनसे लिपटे, उनके गले लग जाये
फिर देखना वृद्धावस्था में उनका जीवन फिर से अंकुरित हो उठेगा।

आप से प्रार्थना करता हूँ यदि ये कहानी अच्छी लगी हो तो कृपया ज्यादा से ज्यादा लोगों को भेजे।

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